सत्य .what is truth

प्रणाम.
इस लेख में कुछ सत्य से जुडी, हिन्दू सभ्यता एवं मान्यतावों का रूप आप से साझा किया है.ज्ञान ब्रम्हांड में हर  दिशा में फेले कणों के समान है जो समझ आजाये तो जिस भांति  एक कण शारीर में आत्मा बन जाता है उसी भांति जीवन का सार ही सार्थक हो जाता है .
सत्य
अदि काल से सत्य की खोज अनवरत पर्किर्या रही है . सत्य  क्या है ? कसे खोजे ? कहाँ मिलेगा ? और भी अनगिनत सवाल . अनगिनत सवाल तो अनगिनत जवाब . जवाब अनगिनत तो अनगिनत कटाक्ष . कटाक्ष अनगिनत तो मान्यतावों का साथ. कुछ भी अनंत नहीं . जब कुछ भी अनंत नहीं तो फिर सत्य कैसे ? एक नया सवाल.
सवाल इतने है की उत्तर भी माया जाल लगते है . जब उत्तर माया जाल है तो वो सत्य क्यों होंगे ? माया तो मिथ्या है . यानि जो मिथ्या नहीं वो सत्य है ? मुझे तो यही सत्य लगता है . यानि जो हमे सत्य लगता है वो ही सत्य है. नहीं , जो  मुझे लगता वो  नहीं ,पर सबको जो लगता है वो ही सत्य है. यानि हमारी जननी , हमारी पृथ्वी सत्य है ,हवा  का आलिंगन सत्य है एवं सूर्य की तपन सत्य है. माना हम पांच तत्वों से बने है, पर सत्य यह है की ,सत्य तीन ही तत्व है. यही सत्य है , जीवन का और इस समय का .जो पहले भी सत्य था ,आज भी है और भविष्य में भी रहेगा. यानि सत्य की सरल परिभाषा मेरे समझ से ------ जो ब्रम्हांड से था ,आज है और भविष में भी रहेगा ,वो ही  एक ब्रहम सत्य है.  
                                                                                                               प्रणाम

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